एक डॉक्टर जिसने पूरे देश को चश्मा पहना दिया

कुछ अख़बारों में रोज फ्रंट पेज पर बड़े-बड़े विज्ञापन छपे रहते थे। जिनमें कुछ इस तरह से लिखा होता :

शहर में एक नई किस्म की आंखों की बीमारी फैल रही है। आपको लगता है कि आपकी आंखें सही है लेकिन ये संभव है कि आप एक बड़ी गलतफहमी में जी रहे हों। एक बार आएं और मुफ्त में चेक-अप करवाएं।

इन विज्ञापनों को बार-बार देख कर कुछ लोगों ने सोचा कि रोज रोज अखबार में इतनी बड़ी खबर छपती है तो जरूर इस बात में कुछ सच्चाई है। चलो क्यों न एक बार दिखा ही लिया जाये और जब मुफ्त है तो हर्ज़ ही क्या है। कई लोगों ने क्लिनिक पहुंच कर अपना चेक-अप करवाया। चेक-अप हो जाने पर डॉक्टर ने बहुत ही गंभीर स्वर में कहा कि बहुत फिक्र के साथ में ये कह रहा हूँ कि आपकी आंखों में इस नई बीमारी का वायरस पनपना शुरू हो गया है। और आपको तुरंत इसका इलाज करवाना चाहिए वरना बहुत जल्द आप दृष्टिहीन हो जाएंगे और इस बीमारी की एक खतरनाक बात यह है कि इस बीमारी का वायरस बहुत तेजी से फैल रहा है और अगर आप समय रहते इलाज नहीं करवाते तो आपके परिवार और आस-पास के लोग भी सुरक्षित नहीं रहेंगे।

कुछ लोगों को इस बात पर संदेह हुआ। स्थिति को भांपते हुए डॉक्टर के असिस्टेंट ने उन लोगों का ध्यान दीवारों पर टंगे पोस्टर्स की तरफ घुमाया जिसमे बहुत ही अच्छी-अच्छी बातें लिखी हुई थी। बहुत सी ऐसी नैतिक बातें जो उन्होंने बचपन में स्कूल में पढ़ी थी या अपने दादा-दादी से सुनी थी। इन पोस्टर्स को देख कर ज्यादातर लोगों ने तस्सल्ली कर ली कि ऐसी सोच रखने वाला इंसान गलत नहीं हो सकता। कुछ लोगों के चेहरे पर अभी भी संदेह के कुछ भाव दिखाई दे रहे थे। इसी बीच में डॉक्टर साहब ने कहा, “क्योंकि ये बीमारी काफी तेजी से फैल रही है और मुझे डर है कि कहीं पूरा शहर और फिर पूरा देश इस भयावह बीमारी से ग्रसित न हो जाये, इसलिए मैंने निर्णय लिया है कि मेरी जीवन भर की जो कमाई है वो मैं इस बीमारी से लड़ने में लगा दूंगा और इसीलिए इस बीमारी से लड़ने के लिए मैं ये इम्पोर्टेड चश्मे बहुत कम दाम पर बांटूंगा। जो आम चश्मे मिलते हैं उस से भी कम। और सिर्फ इसी चश्मे से इस बीमारी का इलाज हो सकता है”। बस ये कहना ही था कि बचा-खुचा जो संदेह किसी के दिमाग में था वो भी झट से दूर हो गया। भला इतना नेक दिल डॉक्टर कहाँ मिलता है आज के जमाने में।

दना-दन काम शुरू हुआ चश्मे बांटने का।

सभी लोग ये सोच कर खुश थे कि क्या कमाल का डॉक्टर मिला है। इतना महंगा इलाज फ्री में कर दिया और इम्पोर्टेड चश्मे देसी चश्मों से भी सस्ते दाम पर। जब वो सब बाहर आये तो उन्हें कुछ अजीब लेकिन बहुत ही खुशनुमा सा अहसास हुआ। उन्होंने ये महसूस किया कि धूप बहुत तेज है लेकिन फिर भी आंखों पर कोई जोर नहीं पड़ रहा उस तेज धूप का। वो एक-दूसरे से कहने लगे कि सच में हमारी आंखें कितनी खराब हो गयी थी। धूप कितनी चूभती थी आंखों में। लेकिन आज कितना आराम मिल रहा है और साथ ही साथ पूरी दुनिया एक अलग, नए रंग में दिखने लगी थी। पीला-पीला सा, बहुत खूबसूरत सा दिख रहा था सब कुछ। मानो बसंत ऋतु का पुनः आगमन हो गया हो।

अब उन्हें जो भी मिलता उनसे वो इस बीमारी के बारे में बताते और उस नेक-दिल डॉक्टर के बारे में बताते। वो हर रंग को अब अलग नाम से पुकारने लगे, जैसे हरे को भूरा, नीले को हरा। हर एक रंग अब उन्हें अलग ही दिखने लगा। जब उनका कोई साथी-संगी उन्हें कहता के भाई तुम गलत कह रहे हो, ये भूरा नहीं हरा रंग है तो वो उन्हें इस बीमारी के बारे में बताते और कहते कि उन्हें भी पहले ऐसा ही लगता था। मटर हरे दिखते थे लेकिन असल में भूरे रंग के होते हैं। तुम्हे भी उस डॉक्टर के पास चलना चाहिये वो इकलौते डॉक्टर हैं जो इस बीमारी को ठीक कर सकते हैं और वो भी लग-भग फ्री में। लेकिन जब उन्हें लगने लगा कि बहुत लोग अब उनसे बहस कर रहे हैं और वो उनकी बात नहीं मान रहे तो कुछ लोगों ने सोचा के इतने लोग गलत नहीं हो सकते। दाल में जरूर कुछ काला है और उन्होंने वो चश्मा उतार दिया। दुनिया फिर से वैसी ही रंगीन दिखने लगी। लेकिन बहुत से लोग ये मानने के लिए राजी नहीं थे कि उस डॉक्टर ने उनका बेवकूफ बना दिया है। इतना भला इंसान गलत नहीं हो सकता। ये लोग बेवकूफ हैं जो समझ नहीं रहे हैं। इन्हें तभी पता चलेगा जब सभी लोग अंधे हो जाएंगे इस बीमारी की वजह से।

अब जब भी उन्हें कोई समझाने की कोशिश करता तो वो कोई भी तर्क सुनने को तैयार न होते। कुछ तो गाली-गलौच पर उतर आते। उन्होंने ये अपना मिशन बना लिया था कि पूरे देश को अंधा होने से बचाना है। चाहे इसके लिए कोई भी रास्ता अपनाना पड़े। इन लोगों के लिए इस बीमारी से लड़ना किसी देशभक्ति से कम नहीं था और वो डॉक्टर जो खुद को लोगों का रक्षक कह कर सबको चश्मा पहना रहा था उनके लिये भगवान समान हो गया था।

नोट- इस कहानी का किसी भी व्यक्ति या समूह से कोई संबंध नहीं है। अगर आपको ऐसा कुछ महसूस होता है तो ये केवल आपके मन का भ्रम है। और अगर आपको इस कहानी को पढ़ कर बुरा लगता है या गुस्सा आता है तो शायद आप भी उन चश्मा-धारियों में से एक हैं। ।। बोलो जय श्री राम ।।

 

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