दिवाली रौशनी का त्यौहार है पटाखों का नहीं

Diwali is a estival of lights not FireCrackers

उच्चत्तम न्यायलय द्वारा पटाखों पर लगाए गए प्रतिबन्ध को सांप्रदायिक रंग देकर हम भारतीयों ने बेवकूफी की एक नयी मिसाल कायम की है। हम सब जानते हैं कि पिछले साल दिवाली के बाद किस तरह 5-6 दिनों तक दिल्ली से धुआं छंटा नहीं था और उस धुंए से सभी दिल्लीवासियों को बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ी थी। दमे के मरीजों के लिए क्या मुसीबत हुई होगी वो तो खैर जाने ही दो।

पिछले साल दिवाली के बाद किस तरह 5-6 दिनों तक दिल्ली से धुआं छंटा नहीं था और उस धुंए से सभी दिल्लीवासियों को बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ी थी।

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